हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बोले- देश का आर्थिक बोझ कम होगा, विकास को मिलेगी गति
Address : छिंदवाड़ा। एक राष्ट्र-एक चुनाव से लोकतांत्रिक यात्रा में नए युग की शुरूआत होगी।
इसके लागू होने के बाद मंत्रियों और अन्य मशीनरी के पास राज्यों और देश के विकास पर ध्यान केंद्रित
करने के लिए पर्याप्त समय होगा।
उक्त बातें हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस रोहित आर्य ने उक्त बातें कहीं।
वे सतपुड़ा लॉ कॉलेज में एक राष्ट्र-एक चुनाव विषय पर राष्ट्रव्यापी विचार एवं परामर्श सम्मेलन में
मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होने एक राष्ट्र-एक चुनाव के सिद्धांत को देशहित का महत्वपूर्ण कदम बताया।
श्री आर्य ने कहा कि इस व्यवस्था से देश की आर्थिक प्रगति, संसाधनों के सदुपयोग एवं राजनीतिक-सामाजिक

विकास में तेजी आएगी। पूर्व न्यायाधीश ने गुरुवार को यह स्पष्ट किया कि एक राष्ट्र-एक चुनाव न
केवल देश के विकास के हित में है बल्कि यह संविधान के दायरे में भी आता है।
उन्होंने बताया कि एक साथ चुनाव कराने से चुनावी प्रक्रिया में स्थिरता आएगी,
अनुचित प्रलोभन एवं धन बल में कमी होगी तथा समय की बचत होगी।
उन्होंने बताया कि 1951-52 में आयोजित पहले आम चुनाव के बाद 1967 तक भारत में लोकसभा
और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही कराए जाते थे।
हालांकि, 1968-69 में कुछ विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने से यह व्यवस्था बाधित हो गई,
परन्तु 1971 में हुए चुनावों के बाद पहली, दूसरी और तीसरी लोकसभा ने पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।
दिल्ली नोट कांड पर टिप्पणी से इंकार
दिल्ली में जस्टिस वर्मा के घर लगी आग के बाद मिले जले हुए नोटों के विषय में श्री आर्य ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि अब वह रिटायर हो चुके हैं और इस मामले पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करेंगे।

राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता आएगी : सांसद
सम्मेलन में सांसद विवेक बंटी साहू भी उपस्थित रहे।
सांसद ने कहा कि आज के समय में एक साथ चुनाव कराने से देश की राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता आएगी
और संसाधनों का सही तरीके से उपयोग हो सकेगा।
देश हित के लिए आवश्यक : यादव
भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव ने एक राष्ट्र-एक चुनाव को राष्ट्र के हित में कई मायनों में फायदेमंद बताया।
उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रहित वाली विचारधारा का यह एक पहलू है।
ये भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में मेयर विक्रम अहाके, पूर्व मंत्री चौधरी चंद्रभान सिंह, पूर्व विधायक पं. रमेश दुबे, ताराचंद बावरिया,
भजनलाल चोपड़े सहित कई वरिष्ठ राजनीतिक एवं सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं।
सम्मेलन के संयोजक अलकेश लांबा, सह संयोजक पियूष शर्मा थे।
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