दूसरी बैठक में तो बाहर से ही नाराज होकर लौट गए
Kanafoosee : छिंदवाड़ा। जिला मुख्यालय के एक नेताजी जो कि जनप्रतिनिधि भी हैं उनकी कुर्सी का मोह
बीतते समय के साथ बढ़ता जा रहा है। पद जाने में यही कोई 6-8 महीने बचे हैं लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता
जा रहा है उनका मोह कुर्सी के लिए प्रबल होता दिख रहा है। मामला हाल ही में कलेक्ट्रेट में हुई बैठक का है।
कानाफूसी है कि देश के प्रधान और नेताजी की पार्टी के मुख्य चेहरे का जन्मदिन आ रहा है। एक माह तक
विभिन्न कार्यक्रम चलेंगे और इन कार्यक्रमों को कैसे करना है इसके लिए कलेक्ट्रेट में बैठक बुलाई गई।
इसलिए हुए नाराज …
सभी समय पर पहुंचे और बैठक शुरू हो गई। ये नेताजी देर से कलेक्ट्रेट पहुंचे, फिर
अपना एक आदमी पहुंचाया कि- जाओ देखकर आओ, सब आ गए क्या ?
उक्त आदमी जब लौटकर आया तो उसने नेताजी को बताया कि
बैठक तो चालू हो गई, बस फिर क्या था, नेताजी तनतनाते हुए कलेक्ट्रेट के
गेट से ही वापस हो गए। अपनी पार्टी के मुख्य चेहरे और देश के प्रधान नेता के मामले में भी इनका
ईगो आढ़े आ गया।
इस किस्से को भी पढि़ए
अब इसके पीछे एक और किस्सा बताया जा रहा है। इन नेताजी को कुछ दिनों पहले कलेक्ट्रेट में ही
हुई बैठक में बुलाया गया था जिसमें इन्हें पांचवे नंबर की कुर्सी पर बैठाया गया था। इससे ये इतने
नाराज हो गए कि बीच में ही बैठक छोड़कर चले गए हालांकि मन की कसक किसी के सामने
इन्होने बाद में निकालते हुए कहा ‘मैं पांचवे नंबर की कुर्सी पर बैठूंगा क्या’। यह बात
जिम्मेदार कानों तक भी पहुंची। इस कारण इस बार की बैठक में इनके लिए तीसरे नंबर की कुर्सी लगाई गई
लेकिन अब इन्हे ये बुरा लगा कि…इनके बिना पहुंचे बैठक कैसे शुरू हो गई ? अब कहा यह जा रहा है कि
कुर्सी पर बने रहने के लिए जब ये नेताजी अपने ‘भगवान’ बदल सकते हैं, संस्था की कंगाली के दौर में सरकारी
खर्च पर बीच बाजार फूहड़ गानों पर ठुमके लगा सकते हैं तो कुछ भी कर सकते हैं ..!
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