मेले में मिल रही कम छूट और किताबों की उपलब्धता पर उठाए सवाल
Book Fair : छिंदवाड़ा। एमएलबी स्कूल में लगाए गए तीन दिवसीय पुस्तक मेले में अभिभावकों को हो रही परेशानी
को लेकर पूर्व सांसद नकुल नाथ ने ट्वीट किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उन्होने अपनी बात साझा करते हुए शिक्षा और किताबों के बाजार में
पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया है।
यह लिखा पूर्व सांसद ने…
”शिक्षा और किताबों के बाजार में पारदर्शिता की आवश्यकता !
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर अपने बच्चों के लिए किताबें, कॉपी, और ड्रेस
खरीदने की जिम्मेदारी आ जाती है। पिछले कुछ वर्षों से कई निजी स्कूलों में बच्चों के लिए जरूरी
किताबों और कॉपी की खरीददारी के लिए कुछ बुक डिपो चिन्हित है!
हालांकि, इन डिपो में दुकानदार अपनी मनमर्जी के अनुसार कीमतें वसूलते हैं, जिससे अभिभावकों को
अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है! हाल ही में छिंदवाड़ा जिले में अभिभावकों को राहत देने के नाम पर
एक पुस्तक मेला आयोजित किया गया है। लेकिन यह मेला केवल 3 दिनों के लिए रखा गया और
इस दौरान आधी से अधिक किताबें इस पुस्तक मेले में उपलब्ध ही नहीं हैं।
इसके अलावा, दुकानदारों द्वारा मात्र 5 प्रतिशत की छूट दी जा रही है, जो काफी कम है।
जबकि अन्य जिलों में यह पुस्तक मेले 10 से 15 दिनों तक के लिए आयोजित किए जा रहे हैं और
वहां 50 प्रतिशत तक की छूट भी दी जा रही है। यह असमानता छिंदवाड़ा के अभिभावकों के लिए अन्यायपूर्ण है।
कुछ स्कूलों में आज कल पुराने किताबों को भी स्वीकार नहीं किया जाता, जबकि पहले सीनियर बैच
के छात्र जूनियर बच्चों को किताबें दे दिया करते थे।
यह परंपरा आजकल की शिक्षा व्यवस्था में गायब हो गई है, जो उनके अभिभावकों के लिए एक और वित्तीय बोझ बन गई है।
छिंदवाड़ा में आयोजित पुस्तक मेला केवल एक खानापूर्ति साबित हो रहा है!
यह आवश्यक है कि इस मेले का एक्सटेंशन किया जाए और बड़े प्रकाशनों को भी इसमें शामिल किया जाए।
साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कॉपी-किताबों की उपलब्धता हो और उन पर उचित छूट मिले।
हमारी शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य बच्चों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना होना चाहिए,
न कि उनके अभिभावकों पर आर्थिक दबाव डालना!
यह जरूरी है कि किताबों के बाजार में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जाए,
ताकि हर बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सके और भविष्य में सशक्त नागरिक बन देश के विकास में अपना योगदान दे सके।”
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