न्यायालय ने एफआईआर के दिए निर्देश, आरोपियों को किया बरी
Court Order : छिंदवाड़ा। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल डोंगरे के न्यायालय ने आबकारी के
एक प्रकरण में सुनवाई के बाद तत्कालीन टीआई सुमेर सिंह जगेत और जांच अधिकारी
सुरेंद्र सिंह राजपूत के विरुद्ध एफआईआर के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मामले में दोनों
आरोपियों को बरी कर दिया है। न्यायालय ने प्रकरण को झूठा मानते हुए तल्ख टिप्पणी भी की
जिसमें कहा कि- सब कुछ पता चलने के बाद न्यायालय मूक दर्शक बना नहीं रह सकता।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल डोंगरे ने जांच अधिकारी सुरेन्द्र सिंह राजपूत और तत्कालीन टीआई
सुमेर सिंह जगेत के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धाराएं 166, 167, 193, 196, 197, 198, 199,
200, 209 और 219 के तहत एफआईआर दर्ज करने के लिए कोतवाली टीआई को आदेशित किया है।
यह है मामला
परासिया पुलिस द्वारा वर्ष 2020 में अवैध शराब परिवहन के संबंध में 34 (2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।
इसमें आरोपी मैग्जीन लाइन परासिया निवासी रंजीत पिता पूरनलाल डेहरिया (34) और संतोष पिता
पूरनलाल डेहरिया (30) थे जिन पर 54 लीटर अवैध शराब परिवहन का आरोप था।

प्रकरण में जांच अधिकारी ने आरोप लगाया था कि स्कूटी जुपिटर के सामने 22-22 लीटर शराब
और स्कूटी की डिक्की में 15 लीटर की कुप्पी में शराब रखकर परिवहन किया जा रहा था।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने न्यायालय के सामने स्वयं स्वीकार किया कि
स्कूटी की डिक्की में 15 लीटर की कुप्पी रखा जाना संभव नहीं है। इस आधार पर न्यायालय ने
पूरे प्रकरण को झूठा माना। न्यायाधीश ने संतोष और रंजीत डेहरिया को मामले में बरी कर दिया।
इस झूठे प्रकरण में संतोष डेहरिया को 51 दिन और रंजीत डेहरिया को 41 दिन जेल में रहना पड़ा।
पुलिस ने इस मामले में न्यायालय के सामने झूठा अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था।
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