MP BJP President : कांग्रेस का ‘मूवमेंट’ तय करेगा भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष ?

दलित समाज से हो सकता है सत्तारूढ़ दल का अगला मुखिया

MP BJP President : भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा को अपने नए मुखिया का इंतजार है।

पहले दिसंबर, फिर जनवरी, फरवरी और अब मार्च में प्रदेश भाजपा को नया अध्यक्ष के मिल जाने के दावे होते रहे हैं या किए जा रहे हैं।

हालांकि मार्च भी जाने को है लेकिन पार्टी ने अब भी कमान किसी नए चेहरे को नहीं सौंपी है।

ऐसे में कयासों का दौर लगातार जारी है।

मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और शिवराज सरकार में नंबर 2 की हैसियत वाले मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा का दावा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए सबसे तगड़ा माना जा रहा है।

लेकिन कांग्रेस के ‘अंबेडकर मूवमेंट’ से भाजपा सोचने पर मजबूर हो गई है।

इस मूवमेंट से कांग्रेस प्रदेश के दलित वोटरों को साधने की जुगत में है।

जाहिर है भाजपा भी इन्हें खोना नहीं चाहेगी…तो दलित वोटरों को ‘अपना’ बनाए रखने या ‘पाने’ के लिए भाजपा को भी कोई न कोई दाव खेलना पड़ेगा।

जानकार बताते हैं कि यह दाव होगा प्रदेश अध्यक्ष पद पर दलित नेता की ताजपोशी।

कांग्रेस के मूवमेंट को लेकर अब माना जाने लगा है कि मध्यप्रदेश भाजपा का अगला प्रदेश अध्यक्ष दलित समाज से हो सकता है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है लेकिन पार्टी की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि जिस तरह से कांग्रेस मूवमेंट चला रही है उससे भाजपा दलितों को रिझाने के लिए दलित कार्ड खेल सकती है।

शाह के बयान पर गर्माई थी सियासत

केंन्द्रीय मंत्री अमित शाह का एक बयान सोशल मीडिया पर पिछले दिनों जमकर वायरल हुआ था।

शाह ने अपने बयान में कहा था कि ‘इतना अंबेडकर-अंबेडकर करने की जगह अगर किसी भगवान का नाम लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता’ उनके इस बयान को कांग्रेस ने बड़ा मुद्दा बनाकर भुनाने की कोशिश की।

लोकसभा में खासा हंगामा हुआ। इसी मामले के बाद से कांग्रेस ने अपना मूवमेंट शुरू करते हुए

27 जनवरी को इंदौर के महू में जय बापू, जय भीम, जय संविधान कार्यक्रम आयोजित किया।

इसमें राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े समेत कांग्रेस के दिग्गज नेता शामिल हुए।

यह मूवमेंट अभी ठंडा नहीं हुआ है।

जटिया के बाद कोई दलित प्रदेश अध्यक्ष नहीं

भाजपा के जानकारों की मानें तो प्रदेश भाजपा ने डॉ. सत्यनारायण जटिया के रूप में अब तक एक ही दलित चेहरा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के रूप में दिया है।

उन्हें वर्ष 2006 में भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। वे कम समय तक अध्यक्ष रहे।

जटिया के पहले और उनके बाद भाजपा ने किसी भी दलित चेहरो को प्रदेश की कमान नहीं सौंपी।

ये है एमपी का एससी गणित

मध्यप्रदेश की कुल आबादी में से तकरीबन बीस प्रतिशत दलित हैं।

इससे जाहिर है कि किसी भी दल की जीत हार में इनका वोट खासा मायने रखता है।

यह वोट बैंक कांग्रेस का कोर वोट बैंक भी माना जाता हैं।

ऐसे में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर दलित नेता की ताजपोशी पार्टी के लिए मायने रखती है।

लालसिंह आर्य दमदार चेहरा

यदि भाजपा दलित कार्ड खेलती है तो इस वर्ग से फिलहाल लाल सिंह आर्य के अलावा कोई दमदार नाम सामने नहीं आया है।

वे भाजपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। संगठन में उनकी छवि अनुभवी और अनुशासित नेता की मानी जाती है।

बहरहाल होली के बाद पार्टी ने संकेत देना शुरू कर दिए हैं कि प्रदेश भाजपा को नए मुखिया के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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