Performance : …तो कुर्सी से उतार दिया जाएगा ओक्टे को !

होने जा रही कामकाज की समीक्षा, कमजोर प्रदर्शन लगा तो कार्रवाई तय

Performance : छिंदवाड़ा/भोपाल। पूर्व सीएम कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा में कांग्रेस जिला अध्यक्ष

विश्वनाथ ओक्टे की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। उनके परफार्मेंस को लेकर पीसीसी के गलियारों में

चर्चाएं चल रही हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि उनका बदलना तय है।

दरअसल मामला मध्यप्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन का है। इसके तहत 15 अप्रैल से

चार दिनों तक प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों की परफार्मेंस जांची जाएगी।

उनके कामकाज की समीक्षा करेंगे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी।

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इस परफार्मेंस रिव्यू में जो भी जिलाध्यक्ष फेल हुआ तो उसे पद से हाथ धोना पड़ेगा।

इसमें प्रदेश कांग्रेस के क्षत्रपों के गृह जिलों को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

इसी में विश्वनाथ ओक्टे भी चर्चा में आ गए हैं क्योंकि वे पूर्व सीएम कमलनाथ के गृह जिले के अध्यक्ष हैं।

दो चरणों में होगी समीक्षा

प्रदेश में कांग्रेस जिलाध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा दो चरणों में की जाएगी। बताया जा रहा है कि

कमजोर प्रदर्शन वाले जिलाध्यक्षों पर कार्रवाई होगी, यहां तक कि हटाने तक का फैसला लिया जा सकता है।

यह समीक्षा काफी अहम मानी जा रही है। दिल्ली से वामसी रेड्डी भी भोपाल आकर पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग करेंगे।

संभागवार जांचेंगे परफार्मेंस

प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी 15 से 18 अप्रैल तक चार दिनों तक संभागवार समीक्षा करेंगे।

पीसीसी में जिलाध्यक्षों को बुलाकर संगठन निर्माण, कामकाज, चुनौतियों और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

इतने समय में संगठन निर्माण में क्या काम किया है, किस तरह से संगठन का गठन हुआ है,

क्या चुनौतियां हैं और आगे किस तरीके से काम करना है इन सब पर चर्चा होगी।

ओक्टे के नाम की चर्चा क्यों ?

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छिंदवाड़ा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विश्वनाथ ओक्टे के नाम की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि

उनकी कार्यप्रणाली कांग्रेस कार्यकर्ताओं को विवादास्पद लग रही है। उनके कार्यकाल में कांग्रेस जनहित

का कोई खास मुद्दा नहीं उठा पाई है। वे सड़क से ज्यादा कांग्रेस भवन में बैठकर सरकार को घेरने में यकीन रखते हैं।

सबसे खास बात जो कार्यकर्ताओं ने भोपाल तक पहुंचाई है वह यह है कि ओक्टे उन कार्यकर्ताओं को

नजर अंदाज करते हैं जिन्हें सीधे पीसीसी ने कोई जवाबदारी सौंप रखी है।

ओक्टे ऐसे कार्यकर्ताओं को सहयोग नहीं करते जिससे संगठन में असंतोष फैल रहा है।

बहरहाल, 15 अप्रैल के बाद ही साफ हो पाएगा कि ओक्टे रहेंगे या जाएंगे !

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