One Nation One Election : एक राष्ट्र एक चुनाव देश के लिए महत्वपूर्ण : कुबेर सूर्यवंशी

अभियान को लेकर संगोष्ठी का आयोजन

One Nation One Election : छिंदवाड़ा। एक देश एक चुनाव अभियान के तहत परासिया पेंचवेली कॉलेज में संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस आयोजन के माध्यम से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ अभियान का शुभारंभ भी किया गया।

इसके साथ ही जिले में 100 स्थानों पर संगोष्ठी और जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

एक राष्ट्र -एक चुनाव को लेकर पोस्टकार्ड अभियान भी चलाया जाएगा।

परासिया पेंचवेली कॉलेज में कार्यक्रम मुख्य रूप से कुबेरसिंग सूर्यवंशी ने आयोजित किया।

संगोष्ठी में मुख्य रूप से संजीव भावरकर, रामप्रसाद कुमरे, समाजसेवी रूपेश सूर्यवंशी ने भी भाग लिया।

संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखते हुए कुबेर सूर्यवंशी ने कहा कि

एक देश, एक चुनाव का विचार भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण और चर्चित विषय रहा है।

बताए मुख्य उद्देश्य

इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक ही समय पर कराया जाए,

जिससे चुनावी खर्चों में कमी, मतदान प्रक्रिया में सुधार, और चुनावों के आयोजन में प्रशासनिक कार्यों में एकरूपता आए।

पक्ष में तर्क

उन्होने कहा कि इस विचार के पक्ष में कई तर्क दिए जाते हैं…जैसे चुनावी खर्चों में कमी, प्रशासनिक कार्य में आसानी, वोटिंग टर्नआउट में सुधार, स्थिर सरकारों का निर्माण आदि।

विपक्ष में तर्क…

उन्होने बताया कि इसके विरोध में भी कई तर्क दिए जाते हैं…जैसे राज्य विशेष की आवश्यकताएं, संवैधानिक और कानूनी चुनौतियां, राजनीतिक असहमति आदि।

राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का तरीका…

श्री सूर्यवंशी ने कहा कि एक साथ चुनाव होने से देशभर में एक ही समय पर चुनावी प्रक्रिया चल रही होती है,

जिससे यह संदेश जाता है कि देश एकजुट है।

यह राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का भी एक तरीका हो सकता है।

संगोष्ठी में वक्ताओं ने संविधान में संशोधन, विधायी प्रक्रिया, चुनाव आयोग की भूमिका, राजनीतिक दलों

और राज्यों की सहमति, राज्य विधानसभा चुनावों के साथ तालमेल, अंतरिम समाधान, वर्तमान स्थिति,

विशेष समिति की रिपोर्ट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन आदि विषयों पर बात रखी।

यह रहा निष्कर्ष

निष्कर्ष के रूप में कहा गया कि ‘एक देश, एक चुनाव’ को लागू करने के लिए अभी भी कई चुनौतियां हैं।

यह एक जटिल प्रक्रिया है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।

सरकार इसके लिए बातचीत और सहमति बनाने के प्रयासों में लगी हुई है, लेकिन इसके लिए व्यापक सहयोग और समय की आवश्यकता होगी।

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