सरकारी जमीनों को भी नहीं बख्श रहे
Kanafoosee : छिंदवाड़ा। गुर्रू और जीते…ये वे नाम हैं जो आजकल हर राजनेता की जबान पर हैं।
कारण है इनकी सेटिंग…! शिकारपुर के खास दरबारी होने के बावजूद दोनों ने अन्य दल की सत्ता में भी
जमकर गोलमाल मचा रखा है। 15 महीने की सरकार और उससे पहले तो जो किया वो किया
लेकिन अब तो दोनों और भी जोश के साथ काम करने में लगे हैं। कानाफूसी है कि शिकारपुर के खास
होने के बावजूद दोनों ने भू-माफिया और शराब माफिया से गठजोड़ कर इस सरकार में सरकारी
जमीनों को अपना बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब सवाल ये उठाए जाने लगे हैं कि जिनके ये खास हैं
उनकी तो फिलहाल चल नहीं रही और जिनकी चल रही है उनके ये खास नहीं हैं…
फिर जमीनों का गोरखधंधा करने और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने के लिए इन्हें
‘अभयदान’ दे किसने रखा है ? ये जोड़ी दो पार्टनर को धोखा देने के लिए पहले ही ‘कुख्यात’ हो चुकी है।
अब ये नए शिकार की तलाश में बताए जा रहे हैं। बहरहाल, दबी जबान में कहा जा रहा है कि
सत्ताधारी अगर इनकी जांच में तंत्र को लगा देते हैं तो न सिर्फ सरकारी जमीनें बच जाएंगी
बल्कि सरकार की इज्जत भी बढ़ जाएगी…वरना ये तो लगे ही हैं ‘कमल’ के नीचे से ‘कीचड़’ निकालने में…!
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