जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए जुन्नारदेव विधायक ने लिखा पत्र
Governance : छिंदवाड़ा। जिले में एक और आदिवासी जनप्रतिनिधि के ‘अपमान’ का मामला सामने आया है। यह मामला
तब सामने आया है जब खुद जनप्रतिनिधि ने इसकी शिकायत पत्र के माध्यम से सरकार से की है।
प्रकरण जुन्नारदेव विधायक सुनील उईके से जुड़ा है। दरअसल, हाल ही में प्रशासन ने तामिया में
सावन महोत्सव मनाया। यह शासकीय कार्यक्रम था, इस नाते जिले के सभी जनप्रतिनिधियों को भी
आमंत्रित किया जाना था। लेकिन जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम में जुन्नारदेव
विधायक सुनील उईके को ही नहीं बुलाया गया। अब इसकी शिकायत विधायक श्री उईके ने विधानसभा
अध्यक्ष और सचिव से कर दी है। इस संबंध में विधायक ने लिखे पत्र में कहा है कि जिन तिथियों में आयोजन
हुआ उन पर वे विधानसभा क्षेत्र में ही मौजूद थे लेकिन उन्हें न तो कोई लिखित आमंत्रण दिया गया और
न ही दूरभाष पर कोई सूचना दी गई। उन्होने आरोप लगाया कि शासन द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल का खुलेआम
और जानबूझकर उल्लंघन किया गया है जो कि अक्षम्य एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।
सरकार के नुमाइंदों को भी किया दरकिनार
‘अपमान’ के इस मामले में जिला प्रशासन इतना आगे निकल गया कि सरकार के नुमाइंदों को भी उन्होने
दरकिनार कर दिया। इसका उल्लेख भी कांग्रेस विधायक सुनील उईके ने पत्र में किया है। उन्होने लिखा है कि कार्यक्रम
में मुख्य बैनर पर न उनका फोटो लगाया, न अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह का और न ही
भारिया प्राधिकरण के अध्यक्ष दिनेश अंगारिया का। गौरतलब है कि तामिया का कुछ हिस्सा अमरवाड़ा
विधानसभा में भी आता है जहां से भाजपा के ही कमलेश शाह विधायक हैं। भारिया प्राधिकरण के अध्यक्ष
दिनेश अंगारिया भी भाजपा से ही हैं। ऐसे में यह मामला चर्चा में है कि प्रशासन उस पार्टी के जनप्रतिनिधियों
को भी कुछ नहीं समझ रही जिनकी सरकार है।
जनपद मामले का भी उल्लेख
जुन्नारदेव विधायक सुनील उईके ने जनपद पंचायत मामले का भी उल्लेख अपने पत्र में किया है। उन्होने
लिखा है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष के स्थान पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी के द्वारा
ध्वजारोहण कर उनका सार्वजनिक अपमान किया गया। उन्होने विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि शासन के प्रोटोकॉल
एवं नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले और आदिवासी जनप्रतिनिधियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले
जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के इस तानाशाही पूर्ण रवैये पर तत्काल संज्ञान लिया जाए एवं कड़ी कार्रवाई की जाए।
इन्हें बताया जिम्मेदार
पत्र में विधायक ने लिखा है कि इस शासकीय आयोजन की जिम्मेदारी जिला नोडल अधिकारी
आरडी सिद्दिकी (परियोजना प्रबंधक), बलराम सिंह राजपूत (लेखापाल, जिला पंचायत छिंदवाड़ा),
ब्लाक के नोडल एसडीओ (राजस्व) जुन्नारदेव एवं सहायक नोडल अधिकारी सीईओ जनपद पंचायत
तामिया की थी।
अपनी ही सरकार में कार्रवाई को तरसे ‘भाजपा जनप्रतिनिधि’
सुनील उईके केक इस पत्र के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि भाजपा
राज में अफसरशाही इस कदर हावी हो गई है कि खुद भाजपा के ही जनप्रतिनिधि अधिकारियों पर कार्रवाई
नहीं करवा पा रहे। मसलन, जुन्नारदेव जनपद अध्यक्ष को अपने ‘अपमान’ के मामले में प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व से
शिकायत के बाद भी धरने की ‘धमकी’ देना पड़ रही है। हालांकि फिर भी कार्रवाई होती ‘नजर’ नहीं आ रही।
अमरवाड़ा मामले में तो गजब हो गया। वहां जनपद अध्यक्ष अपने ‘अपमान’ के मामले में शिकायत के बजाए
सीईओ को बचाते नजर आ रहे हैं। उन्होने तो खुद ही एक नेता को फोन कर सीईओ को ‘माफ’ करने की अपील
कर डाली। बहरहाल, वस्तु स्थिति जो भी हो लेकिन इससे भाजपा की किरकिरी जमकर हो रही है।
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