शामिल हुए चेहरों को तवज्जो, मूल भाजपाई के हाथ में अब भी ‘दरी’
BJP MP News : भोपाल। कांग्रेस ‘मुक्त’ भारत का सपना और स्लोगन लेकर चल रही भाजपा अब प्रदेश में लगभग
कांग्रेस ‘युक्त’ हो चुकी है। कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए चेहरों को जिस प्रकार तवज्जो दी जा रही है
उससे साफ नजर आ रहा है कि मूल भाजपा कार्यकर्ता के हाथ में अब भी वही ‘दरी’ है जिसे वह
अब तक अपने वरिष्ठों को आसीन करने के लिए बैठकों और सभाओं में बिछाते आए हैं।
मूल भाजपा कार्यकर्ता अब यही दरी उन चेहरों के लिए भी बिछाने मजबूर हैं जो कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए हैं।
इसका अंदाजा पिछले दिनों निगम मंडलों में की गई नियुक्तियों से लगाया जा सकता है।
इन नियुक्तियों को लेकर भाजपा में अंदरूनी असंतोष पनपने लगा है।
- कांग्रेस से भाजपा में आए भितरवार के केशव सिंह बघेल को राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम
का अध्यक्ष बनाया गया है। इन्हें वर्ष 2022 में पंचायत चुनावों के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण
कांग्रेस ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। उन्हें कांग्रेस में ग्वालियर जिला
ग्रामीण महामंत्री बनाया गया था। निष्कासन के बाद लोकसभा चुनाव से पहले मई 2024 में
बघेल भाजपा में शामिल हो गए थे।
- भाजपा से छह वर्ष के लिए निष्कासित महेश केवट को राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।
निवाड़ी जिले के ओरछा निवासी केवट को नगरीय निकाय चुनाव के समय भाजपा ने
27 जून 2022 को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किया था। उनका निष्कासन अभी खत्म नहीं हुआ है,
फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण पद दे दिया गया है।
- कांग्रेस से भाजपा में आए रामलाल मालवीय को अनुसूचित जाति (एससी) आयोग में सदस्य बनाया गया है।
मालवीय लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का करीबी
माना जाता था। अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।
- कांग्रेस से भाजपा में आए अशोक शर्मा को विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ग्वालियर का अध्यक्ष
बनाया गया है। वह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे से हैं।
2020 में हुए उपचुनावों के पहले कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पद से इस्तीफा देकर सिंधिया के साथ
उन्होंने भाजपा का दामन थामा था।
- ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष बनाए गए सुधीर गुप्ता भी
सिंधिया खेमे से आते हैं, जो उनके साथ ही भाजपा में आए थे।
– कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए प्रदेश के पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत विधानसभा का उपचुनाव हार गए थे।
उन्हें मध्य प्रदेश राज्य वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया है।
- पूर्व सांसद केपी यादव को राज्य स्टेट सिविल सप्लाई कारपोरेशन (नागरिक आपूर्ति निगम) का अध्यक्ष
बनाया गया है। केपी यादव पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी थे और कांग्रेस में थे,
लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे।
भविष्य को लेकर चिंता
मूल भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होने पार्टी की तन-मन-धन से सेवा की और कार्यकर्ताओं को देवतुल्य
बताने वाली वर्तमान भाजपा की कार्यप्रणाली को लेकर उन्हें अपने भविष्य की चिंता होने लगी है।
उनका पार्टी से सवाल है कि आखिर वे कब तक दरी बिछाएंगे ?
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